यतीन्द्र प्रवण प्रभावम – भाग २१
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम << भाग २० श्रीशैलेश स्वामीजी और श्रीविळाञ्चोलैप्पिळ्ळै श्रीशैलेश स्वामीजी अपने दिव्य मन में यह निश्चित करते हैं कि उन्हें तिरुवनन्तपुरम जाकर श्रीविळाञ्चोलैप्पिळ्ळै स्वामीजी का अभिवादन कर उनसे सम्प्रदाय के गूढ़ार्थ सीखना चाहिये। आऴवार के मुख्य शिष्य होने का गौरव प्रगट कर वें मंदिर के … Read more