यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४२
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४१ जब आच्चि अपने पिताजी के तिरुमाळिगै में निवास कर रही थी तब कन्दाडै अण्णन् के पिताजी देवराज तोऴप्पर् का श्राद्ध (तीर्थम्) होना था। अण्णन् ने आच्चि को बुलाया श्राद्ध के लिये प्रसाद बनाने को कहा। आच्चि भी वहाँ गई और पूर्ण … Read more