यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् – भाग ४४
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः यतीन्द्र प्रवण प्रभावम् << भाग ४३ अण्णन् ने जीयर् स्वामीजी के शरण होने का निर्णय किया तदागतां तां व्यतिदामनिन्दितां व्यभेदहर्षां परिधीनमानसाम्।शुभान्निमित्तानि शुभानिभेजिरे नरंश्रियाजुष्टमिवोपजीविनः ॥ (जैसे निधन जनों को धनी व्यक्ति मिलता और लाभ प्राप्त होता हैं, कुछ शुभ संकेतों से सीता माता प्राप्त कर स्वयं को खायम … Read more