श्रीवचन भूषण – सूत्रं १५३
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवरमुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नम: पूरी श्रृंखला << पूर्व अवतारिका इतना ही नहीं, मध्यस्थता का एक अन्य उद्देश्य भी है। सूत्रं – १५३ स्वरूप सिद्धियुम् अत्ताले। सरल अनुवाद इससे व्यक्ति को अपने वास्तविक स्वरूप का भी ज्ञान होता है। व्याख्या स्वरूप … स्वरूप – चेतन के लिए यह … Read more